| سال 1316 | |
| کرشمه کار تنه و گرهوه کار منه | سياهي سر زلف تو روزگار منه |
| يو هر قدر که بـپـيـچـس گره بکار منه | دلم نخواست که زلف سياسه خم بزنه |
| که مرگ حاضر و هر دم بانتظار منه | ز ديري تو چو نو خين ايريسه از دل مو |
| خدا نکرده بفهمي تو روزگار منه | تمام حسرت دلتنگي مو از اينه |
| گذشت افسر ! دي روزگار خوشحالي | |
| خزون عشق گر هده گل بهار منه | |